धनतेरस का अर्थ और उससे जुड़ी कुछ कहानियाँ

Meaning of dhanteras in hindi 

धनतेरस ( Meaning of dhanteras in hindi )शब्द का अर्थ धन और तेरस को मिला के बनाया गया है। माना गया है और ‘तेरस’ मतलब तेरवां दिन। धनतेरस माता लक्ष्मी के पूजा का दिन होता है जो की कृष्ण पक्ष (पूनम से अमावस्या की तरफ बढ़ते हुए) से तेरवें दिन आता है। धनतेरस पर सभी लोग अपने व्यवसायिक स्थलों और घरों को सजाते हैं और महूर्त के अनुसार लक्ष्मी पूजन किया जाता है।

धनतेरस पर सभी प्रकार की नयी वस्तुओं को खरीदना शुभ माना जाता है, और सभी बाजारों को सजाया जाता है। धनतेरस के दिन सभी प्रकार की वस्तुऐं जैसे की बर्तन, कपड़े, आभुषण, सोना, चांदी, वाहन आदि को खरीदा सौभाग्य की निशानी कहा गया है।

धनतेरस के पीछे की कुछ कहानियाँ

धनतेरस का अर्थ और उससे जुड़ी कुछ कहानियाँ
धनतेरस का अर्थ और उससे जुड़ी कुछ कहानियाँ

 

धनवंतरी की कहानी

पुराणी लेखनी के अनुसार धनवंतरी एक महान चिकित्सक [Great doctor ] थे जिन्हे देवों का दर्जा प्राप्त था। मान्यताओं के अनुसार वे विष्णु भगवान का अवतार माने जाते हैं।

ऐसा भी कहा जाता है की समुद्र मंथन के समय जब शंकर भगवान ने विष पि लिया था तो वो धनवंतरी ही थे जिन्होंने महादेव को अमृत प्रदान किया था।

धनवंतरी का पृथ्वी पर आगमन समुद्र मंथन के समय हुआ था और इसलिये धनतेरस, दिपावली के दो दिन पहले धनवंतरी के जन्मदिन के रूप में भी मनाया जाता है।

धनवंतरी विष्णु के अवतार हैं और इनकी चार भुजाएँ हैं। दो भुजाओं में से एक में जलूका, औषधि और दूसरे में अमृत कलश है और बाकि दो भुजाओं में शंख और चक्र है।

धनवंतरी को स्मरण करने के लिए मन्त्र है
ॐ धन्वंतरये नमः॥

राजा हेमा उनके पुत्र यमराज और धनतेरस 

 

धनतेरस का अर्थ और उससे जुड़ी कुछ कहानियाँ
धनतेरस का अर्थ और उससे जुड़ी कुछ कहानियाँ

राजा हेमा के पुत्र के बारे में सभी ज्योतिष्यों की राय थी की उसकी कुंडली कहती है की शादी के चौथे दिन उसकी मृत्यु सर्प के काटने से हो जाएगी। पुत्र की शादी के बाद जब उसकी पत्नी को यह पता चला तो उसने अपने पति को बचाने की ठान ली।

शादी के चौथे दिन रात्रि में राजा हेमा की पुत्रवधू ने पूरे महल में असंख्य दीप जलाए और पुरे महल को जगमग कर दिया, उसने जगह-जगह सोने चाँदी के आभूषण रखे ताकि उनसे टकरा कर दीपकों की रौशनी और भी बढ़ जाये।

राजा हेमा की पुत्रवधू ने मधुर संगीत का भी आयोजन किया, जब यमराज सर्प के रूप में राजा के पुत्र का जीवन हरण करने आए तो महल की चकचोँध रौशनी के कारण उनकी द्रष्टि चली गयी और वे पूरी रात धन-आभूषणों के ढेर पर बैठ कर संगीत सुनते रहे।

और इस प्रकार राजकुमार की जान बच गयी। और तभी से यह दिन धनतेरस  और ‘यमदीपदान’ के रूप में मनाया जाता है। इस दिन यम से सबकी लम्बी आयु की कामना की जाती है और उनके सम्मान में एक दीपक जलाया जाता है जो की पूरी रात प्रज्वलित किया जाता है।

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