देवों के देव महादेव और माता पार्वती की शादी की सालगिरह के रूप में पुरे भारतवर्ष में शिव भक्तों द्वारा मनाया जाने वाला त्यौहार है महाशिवरात्रि। दुसरे सभी प्रमुख त्यौहार जो की दिन में मनाएं जाते है महाशिवरात्रि इन सभी त्यौहारों के विपरीत रात में मनाई जाती। भक्त अपने प्रिय भगवान को खुश करने की लिए दिन में उपवास रखते हैं और रात भर जाग कर शिव महिमा में लीन हो भजन कीर्तन करते हैं। कई भक्त महादेव और पार्वती की शादी का आयोजन रखते है और अपने परिवार और मित्रों के साथ हर्षो उल्लास के साथ त्यौहार को मानते हैं। महाशिवरात्रि भक्तों के लिये एक बड़ा ही महत्वपूर्ण दिन होता है। महा-शिवरात्रि के दिन भक्त अपने अपने तरीके से शिव को खुश करने की कोशिश करते हैं। इस दिन दान का भी बहुत महत्त्व होता है और भक्तों द्वारा भंडारों का आयोजन किया जाता है। शिव मन्दिरों में साज़-सज्जा की जाती है और सुबह से ही भक्त दर्शन के लिए मन्दिर पहुँचने लगते हैं। दुध, घी, जल, पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है , शिवलिंग का श्रृंगार किया जाता है और हर्षो उल्लास के माहौल में भजन करते हैं।

महाशिवरात्रि हिंदू महीने के अनुसार फाल्गुन माह में अमावस्या की 14 वीं रात को पड़ती है, यह तिथि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार मार्च माह में आती है। शिव भक्त महाशिवरात्रि को बहुत ही शुभ दिन मानते हैं , पौराणिक कथाओं के अनुसार महाशिवरात्री के और भी कई मायने हैं। किंवदंतियों के अनुसार महाशिवरात्रि ही वो दिन था जब शिव जी ने अपने आप को लिंग स्वरूप के प्रकट किया था, कुछ के अनुसार शिवरात्रि की रात ही मौलिक निर्माण, संरक्षण और विनाश को दर्शाने वाले नृत्य ‘तांण्डव’ का प्रदर्शन शिव ने किया था और इस कारण भी महाशिवरात्रि की तिथि महत्वपूर्ण बन जाती है। महाशिवरात्रि जीवन और दुनिया में अंधेरे और अज्ञान पर काबू पाने की याद दिलाता है।
